कंगना रनौत और गटर छाप संस्कृति पर बहस

कंगना रनौत एक भारतीय जनता पार्टी की मुखर सांसद हैं। उनकी सारी दुनिया में कला के माध्यम से एक पहचान बनी हुई है। उन्होंने जंतर-मंतर पर कुछ महिलाओं के गंदे प्रदर्शन की तुलना गटर-छाप संस्कृति से की है। उन्होंने गटर-छाप संस्कृति की महिलाओं की कुछ विशेषताएं भी बताई हैं। कंगना के अनुसार ये महिलाएं पढ़ने-लिखने में कमजोर होती हैं, अपने माता-पिता पर आर्थिक बोझ डालती हैं। इन्हें परिवार से स्वतंत्रता चाहिए, समाज से स्वतंत्रता चाहिए। इन्हें अपने शरीर की भी स्वतंत्रता चाहिए। ये कभी नहीं सोचतीं कि इन्हें कोई परिवार बनाना है, इन्हें बच्चों की चिंता करनी है। ये कभी यह नहीं सोचतीं कि जवानी ढल जाएगी, तो मां या सास भी बन पाएंगी। इसकी इन्हें चिंता नहीं है। इन्हें चिंता है मौज-मस्ती की। इस तरह की गटर-छाप महिलाएं हमेशा इसी तरह के पुरुषों को भी खोज लेती हैं और ये दोनों मिलकर समाज में गंदगी फैलाते हैं।

मैंने भी इस विषय पर गंभीरता से विचार किया और मुझे ऐसा लगा कि गटर-छाप सिर्फ लड़कियां ही नहीं होती हैं, बल्कि कुछ लड़के भी इस तरह के गटर-छाप होते हैं और ये दोनों मिलकर ही एक गटर-छाप संस्कृति का निर्माण करते हैं। मैं कंगना रनौत को इतना साफ-साफ लिखने के लिए धन्यवाद देता हूं। कंगना रनौत की आलोचना के लिए गटर-छाप लड़के और लड़कियों की टीम भी खुलकर सामने आ गई है। आप इन सबकी अच्छी तरह पहचान कर सकते हैं।