मनुस्मृति, ईश्वर और खुदा पर पुनर्विचार

कल संसद में कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने मनुस्मृति के खिलाफ बहुत-सी बातें कही और मनुस्मृति का विरोध किया। कल ही संसद में मुसलमानों के सबसे बड़े नेता ओवैसी ने यह भी घोषित किया कि संसद में राष्ट्रगीत के विषय में जो कानून बनाया है, हम उसे नहीं मानेंगे, क्योंकि हम खुदा को सर्वशक्तिमान मानते हैं और खुदा के अलावा हम किसी को नहीं मानेंगे।

लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे अथवा ओवैसी इस बात को भूल गए कि अब जमाना बदल गया है। एक जमाना था जब ईश्वर की अपेक्षा खुदा भारत में अधिक शक्तिशाली थे। उस समय उत्तर प्रदेश और बिहार के अनेक नामी मुस्लिम गुंडे मनमाना अत्याचार करते थे और खुदा सबको शक्ति देता था। मुझे याद है कि आजम खान को खुदा की ही शक्ति प्राप्त थी कि उसने मुजफ्फरपुर में खुलेआम हत्या करने वालों को 24 घंटे के अंदर जेल से मुक्त करा दिया था।

मैं मानता हूँ कि उस समय आपका खुदा सर्वशक्तिमान था, लेकिन अब समय बदल गया है। अब हमारा ईश्वर अधिक शक्तिशाली हो गया है। अब उत्तर प्रदेश और बिहार के नामी गुंडे खुदा के पास चले गए हैं। अब आजम खान जेल जा रहे हैं और यदि ओवैसी ने भी कोई कानून तोड़ा, तो उन्हें भी खुदा बचा नहीं सकेगा।

इसलिए अब मेरा निवेदन है कि खड़गे भी अब बदली हुई परिस्थितियों को स्वीकार करें। अब कुरान और मनुस्मृति के बीच यदि टक्कर होगी, तो उस टक्कर में कुरान जीतेगा ही, यह आवश्यक नहीं है। इसलिए स्थिति के अनुसार व्यक्ति को अपने निर्णय में संशोधन करना चाहिए। अब खुदा और ईश्वर को एक मानना शुरू कर दीजिए, सारे झगड़े खत्म हो जाएंगे।