नई समाज व्यवस्था में परिवार का संवैधानिक ढांचा

10 अगस्त प्रातः कालीन सत्र। नई समाज व्यवस्था पर चर्चा। हम लंबे समय से इस बात पर गंभीरता से सोचते रहे कि समाज में बढ़ते स्वार्थ और उद्दंडता पर नियंत्रण में सबसे अच्छी भूमिका परिवार की हो सकती है, लेकिन परिवार का संवैधानिक ढाँचा कैसा हो, इस पर हम कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाल पा रहे थे। कल हम लोगों ने लंबी चर्चा के बाद परिवार के संवैधानिक ढाँचे पर अंतिम निष्कर्ष निकाला है। उसके अनुसार भारत में प्रत्येक परिवार के संविधान में 6 मूलभूत बातें अनिवार्य रूप से होंगी।

  1. एक संयुक्त संपत्ति और संयुक्त उत्तरदायित्व के आधार पर बने संविधान के अंतर्गत रहने के लिए सहमत व्यक्तियों के समूह को परिवार माना जाएगा।

  2. दो इस तरह के परिवार यदि एक साथ मिलकर कोई समूह बनाते हैं, उस समूह को संयुक्त परिवार माना जाएगा।

  3. हर परिवार का एक प्रमुख होगा और हर परिवार का एक मुखिया होगा। प्रमुख के लिए प्राथमिकता अधिक उम्र के व्यक्ति को दी जाएगी। किंतु यदि संयुक्त परिवार होगा तो मुखिया तो प्रत्येक परिवार का अलग-अलग होगा, किंतु प्रमुख संयुक्त परिवार का एक हो सकता है।

  4. प्रत्येक परिवार अपना एक संविधान बनाएगा, जो परिवार के सभी लोग मिलकर सर्वसम्मति से बनाएँगे। यह संविधान ऊपर की इकाई के पास रजिस्टर्ड होगा। किंतु संयुक्त परिवार होगा तो संयुक्त परिवार का एक संविधान हो सकता है, जो संयुक्त परिवार के सभी लोग मिलकर बना सकते हैं।

  5. परिवार के प्रमुख और मुखिया के अधिकार, दायित्व, कर्तव्य, सीमाएँ, परिवार की चुनाव पद्धति, कार्य प्रणाली—सब परिवार के संविधान के अनुसार होगी। प्रत्येक परिवार अपना संविधान बनाने के लिए स्वतंत्र होगा।

  6. ऊपर की इकाई में रजिस्ट्रेशन परिवार के प्रमुख के नाम से होगा और परिवार का मुखिया उसका संचालन करेगा। संयुक्त परिवार की स्थिति में संचालन के लिए परिवार प्रमुख किसी भी व्यक्ति को नियुक्त कर सकता है।

प्रत्येक परिवार अपना-अपना संविधान बनाने के लिए स्वतंत्र होगा, किंतु उसमें उपरोक्त 6 बातें अनिवार्य रहेंगी। आप लोग इस संबंध में अपने विचार दे सकते हैं। हम उन पर विचार करने के बाद अंतिम प्रारूप बनाएँगे और आपको प्रस्तुत करेंगे।