वर्तमान भारतीय राजनीति में त्रिस्तरीय नेतृत्व का उदय

आदर्श राजनीति में तीनों का समान संतुलन आवश्यक माना जाता है—एक है ब्राह्मण, एक क्षत्रिय और एक वैश्य। तीनों में कोई ऊपर-नीचे नहीं होता, तीनों की भूमिकाएँ लगभग समान होती हैं।

पहली बार भारतीय राजनीति में तीनों का संगम दिख रहा है। वर्तमान राजनीति में मोहन भागवत और योगी आदित्यनाथ ब्राह्मणों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। नरेंद्र मोदी और अमित शाह क्षत्रियों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। अदानी और अंबानी वैश्यों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। तीनों मिलकर भारतीय राजनीति को सही दिशा में ले जा रहे हैं।

दूसरी ओर राहुल गांधी को देखिए—राहुल, प्रियंका और सोनिया—इन तीनों के अलावा कोई चौथा व्यक्ति इन्हें दिखता ही नहीं है। दिन-रात पूंजीपतियों को गाली देना है, दिन-रात मोदी और अमित शाह की आलोचना करना है, दिन-रात संघ और मोहन भागवत का विरोध करना है, और कहते हैं कि हम राजनीति करते हैं—क्या ख़ाक राजनीतिज्ञ हैं!

राजनीति का क, ख, ग सीखना हो तो नरेंद्र मोदी, मोहन भागवत, अदानी, अंबानी, योगी आदित्यनाथ और अमित शाह से सीखो। अब भारत की राजनीति तानाशाही से नहीं, परिवारवाद से नहीं, बल्कि संतुलन से ही चलेगी।