अमेरिका, ट्रंप और भारत: नरेंद्र मोदी की व्यावहारिक कूटनीतिक रणनीति

वर्तमान समय में दुनिया के राजनीतिक समीकरण बदलने में ट्रंप की भूमिका सबसे ऊपर रही है। पिछले 1 वर्ष में ट्रंप ने सब उथल-पुथल कर दी है, सारे समीकरण बदल दिए गए हैं। मित्र और शत्रु की पहचान गड़बड़ हो गई है।

वर्तमान वैश्विक वातावरण में मेरे विचार से सिर्फ नरेंद्र मोदी ही ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने इस सारे समीकरण से अपने को किनारे रखा। नरेंद्र मोदी ने ट्रंप से विवाद भी मोल नहीं लिया और नजदीकी भी बढ़ाना उचित नहीं समझा। क्योंकि जब माहौल अशांत हो तो अपने को सुरक्षित बचा लेना ही ज्यादा अच्छा होता है।

जिन लोगों ने ट्रंप से नजदीकी बढ़ाई, उन्हें ट्रंप के द्वारा अपमानित भी होना पड़ा। जिन लोगों ने ट्रंप से दूरी बनाकर रखी, वे लोग लगभग सुरक्षित बच गए।

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने अब तक जो भी कार्य किए हैं, वे सब कार्य ठीक दिशा में दिखाई देते हैं, यद्यपि उनका तरीका ठीक नहीं है। ट्रंप का बोलने का तरीका नहीं है, काम करने का तरीका नहीं है, बहुत अधिक घमंड है, लेकिन दिशा ठीक है।

ट्रंप ने एक बदलाव किया कि सारी दुनिया की चिंता करने की अपेक्षा उन्होंने अमेरिका को मजबूत बनाना शुरू किया। परिणामस्वरूप भारत को भी अपनी नीति बदलनी पड़ी।

ट्रंप ने ईरान के साथ भी जो किया है, वह बिल्कुल ठीक किया है। भारत ने भी इस संबंध में उचित कदम उठाए हैं।

भारत में अनेक नेताओं ने नरेंद्र मोदी पर दबाव डाला कि ट्रंप के सामने झुकना उचित नहीं है, लेकिन इन मूर्खों को यह पता नहीं है कि अमेरिका ने रूस की संपत्ति जब्त कर रखी है, ईरान की संपत्ति जब्त कर रखी है। ईरान और रूस अपनी संपत्ति नहीं छुड़ा पा रहे और यह मूर्ख राजनेता ट्रंप के सामने 56 इंच का सीना दिखाने की बात करते हैं।

मैं नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देता हूं कि वह ऐसे मूर्ख सलाहकारों से आज तक दूर बने रहे, क्योंकि मूर्खों की सलाह हमेशा घातक होती है।

मेरे अपने विचार में नरेंद्र मोदी दुनिया में एकमात्र ऐसे राजनेता हैं जिन्होंने ट्रंप के साथ संतुलित व्यवहार किया।