90% समाज को जागरूक बनाने का समय

26 जुलाई प्रातःकालीन सत्र।

यह बात पूरी दुनिया में प्रमाणित होती जा रही है कि दुनिया में स्वार्थी तत्वों की संख्या और शक्ति बढ़ रही है। भारत भी इस बीमारी से अछूता नहीं है। भारत में भी लगातार इस तरह के लोगों की संख्या और शक्ति बढ़ रही है।

मैं यह जानता हूं कि समाज में 90% लोग भावनाप्रधान होते हैं। बुद्धिप्रधान लोगों की संख्या 10% के आसपास ही होती है और यह 10% लोग ही 90% लोगों का मार्गदर्शन भी करते हैं, संचालन भी करते हैं, व्यवस्था भी चलाते हैं।

वर्तमान भारत में इन 10% लोगों में अधिकांश की नीयत खराब है। उनके अंदर त्याग-भाव नहीं है, सिर्फ और सिर्फ स्वार्थ आ गया है। इन परिस्थितियों में यह 90% मिलकर भी ठगे जा रहे हैं, क्योंकि इन 90% में धूर्त लोगों से बचाव की समझदारी भी नहीं है और ताकत भी नहीं है।

ऐसे खतरनाक वातावरण में हम लोगों को इस समस्या का समाधान खोजना है। क्योंकि धर्म, राजनीति और समाज-व्यवस्था इन तीनों पर लगातार धूर्त बुद्धिजीवियों का एक अधिकार होता जा रहा है।

वातावरण निराशाजनक है, लेकिन हमें मार्ग भी खोजना ही होगा। यही सोचकर हम लोगों ने यह प्रयास शुरू किया है कि 90% लोगों में से कुछ लोगों को समझदार बनाया जाए और यह लोग इन 10% लोगों को बेनकाब करें, उनको शक्तिशाली बनाने का प्रयत्न करें।

यही सोचकर हम लोगों ने "शराफत से समझदारी की ओर" का नारा दिया है। हम जानते हैं कि 10% स्वार्थी तत्वों में से अधिकांश हमारी योजना से सहमत नहीं होंगे, परंतु फिर भी हम "शराफत से समझदारी की ओर" माध्यम से इस समस्या का समाधान खोजने के लिए सक्रिय हैं।