बढ़ती वैश्विक हिंसा और मानवता के सामने खड़ा संकट
हम लगातार दुनिया में बढ़ते हुए युद्धों को लेकर चिंतित हैं। आम लोगों के भीतर हिंसा और स्वार्थ की प्रवृत्ति भी ब...
हम लगातार दुनिया में बढ़ते हुए युद्धों को लेकर चिंतित हैं। आम लोगों के भीतर हिंसा और स्वार्थ की प्रवृत्ति भी ब...
भारत में लगभग 90% लोग भावना प्रधान होते हैं और केवल 10% लोग ही बुद्धि प्रधान होते हैं। ये 90% लोग न तो समस्याए...
हम पाँच दिनों के माँ संस्थान सम्मेलन की चर्चा कर रहे हैं। मैं पहले ही स्पष्ट कर चुका हूँ कि माँ संस्थान केवल स...
तंत्र और सरकार—इन दोनों में क्या अंतर है, इस विषय पर हम आज चर्चा नहीं करेंगे। लेकिन हम यह अवश्य स्पष्ट क...
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पूरे भारत में यह प्रश्न लंबे समय से अनुत्तरित है कि हमारे इतने बड़े-बड़े विद्वान बैठकर संविधान बना रहे थे और उ...