भारत के लिए अवसर: ईरान–संयुक्त राज्य अमेरिका टकराव का नया अर्थ
ऐसा समय जीवन में कभी-कभी आता है जब आपके सामने अवसर के द्वार खुले होते हैं, लेकिन भूलवश आप उस अवसर को आपदा समझ लेते हैं। हम भारतीयों के लिए वर्तमान युद्ध भी ऐसा ही एक अवसर लेकर आया है।
ईरान और अमेरिका आपस में टकरा रहे हैं। इस टकराव से भारत का प्रत्यक्ष रूप से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन भारत के लिए यह परिस्थिति एक अवसर अवश्य लेकर आई है। सच तो यह है कि भारत के लिए ट्रंप की बढ़ती शक्ति भी एक अप्रत्यक्ष चुनौती थी और ईरान की बढ़ती शक्ति भी। दोनों की ताकत लगातार बढ़ रही थी और भारत के लिए यह चिंता का विषय था। ऐसे समय में जब दोनों आपस में टकरा गए हैं, तो उनकी ताकत कमजोर हो रही है और भारत के सामने एक अवसर उपस्थित हुआ है।
भारत तेल आयात पर काफी हद तक निर्भर है। दूसरी ओर, भारत के पास पर्याप्त मात्रा में मीठा पानी उपलब्ध है। वर्तमान परिस्थितियों में तेल का संकट पैदा होने की संभावना है, और यह हमारे लिए अप्रत्यक्ष रूप से एक अच्छा अवसर भी हो सकता है कि हम तेल की खपत कुछ कम कर लें। यदि इस संकट काल में तेल के मूल्य बढ़ा दिए जाएँ, तो यह भारत के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है। इससे तेल की खपत कम होगी, भारत की अर्थव्यवस्था में सुधार आएगा और पर्यावरण भी बेहतर होगा।
दूसरी ओर, भारत मीठे पानी का निर्यात भी बढ़ा सकता है, क्योंकि जिन खाड़ी देशों में युद्ध या तनाव की स्थिति है, वहाँ मीठे पानी की कमी हो सकती है। इस प्रकार भारत को दोहरा लाभ मिल सकता है। एक ओर प्रतिस्पर्धी शक्तियाँ आपस में टकराकर कमजोर हो रही हैं, और दूसरी ओर भारत इस अवसर का लाभ उठाकर अधिक आत्मनिर्भर बन सकता है।
आवश्यकता इस बात की है कि वर्तमान विपक्ष सरकार से इस प्रकार की नीतिगत मांग करे और सरकार भी उस पर गंभीरता से विचार करे। यदि विपक्ष और सरकार मिलकर काम करें, तो आपदा को अवसर में बदला जा सकता है।
ईश्वर भारत के विपक्षी दलों को सद्बुद्धि दे कि वे इस दिशा में गंभीरता से विचार करें।
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