महिला आयोग और विवादित बयान पर प्रतिक्रिया
कल कांग्रेस के एक बड़े नेता ने यह सच बात सबके सामने कह दी कि राजनीति में अनेक महिलाएं अपनी क्षमता से अधिक शक्ति और सुविधा प्राप्त करने के लिए पुरुष नेताओं के साथ कंप्रोमाइज करती हैं। बात तो बिल्कुल सही है और सही तरीके से कही गई है, लेकिन मुझे आश्चर्य हुआ कि महिला आयोग ने इस बात के लिए उसे नोटिस दे दिया।
कुछ अन्य महिला नेताओं को भी यह बात बहुत बुरी लगी, जबकि इस तरह के कंप्रोमाइज का होना एक आम बात है और सारी दुनिया जानती है। इस तरह का कंप्रोमाइज सिर्फ राजनीति में नहीं होता है, खेलों में भी होता है, सिनेमा में भी होता है, धर्मगुरुओं में भी होता है, नौकरियों में भी होता है।
समाज के हर क्षेत्र में यदि महिलाएं अपनी क्षमता से अधिक तेज गति से कुछ सुविधा या पद प्राप्त करना चाहती हैं, तो वे ऐसा कंप्रोमाइज करती हैं। यह कंप्रोमाइज सिर्फ महिलाएं ही नहीं करतीं, अनेक पुरुष भी करते हैं। अनेक पुरुष भी महिलाओं को एक-एक रात के लिए कई लाख रुपये दे देते हैं।
यह बात भी आमतौर पर जानी जाती है कि कई महिलाएं अपने माता-पिता की सारी सुविधाएं छोड़कर पुरुष के घर में चली जाती हैं। यह सवाल क्यों नहीं पूछा जाता कि उन्हें वहां विशेष क्या मिल जाता है? कई पुरुष भी अपने माता-पिता की तुलना में महिलाओं के पीछे दीवाने हो जाते हैं। इसका मतलब यह है कि कुछ इस तरह का जरूर है, जिसके कारण महिला या पुरुष एक-दूसरे के साथ कंप्रोमाइज कर लेते हैं।
आप महिला आयोग से यह प्रश्न कर सकते हैं कि जिस व्यक्ति ने यह बात कही है, उस व्यक्ति को अपनी बात सिद्ध करने के लिए कितने उदाहरण देने पड़ेंगे और क्या इस तरह की चर्चा को इस तरह आगे बढ़ाना राजनेताओं और महिला नेताओं के हित में है।
क्या एपिस्टिम फाइल्स ने उक्त सत्य को दुनिया के सामने स्थापित नहीं कर दिया है? इसलिए मेरे विचार से इस तरह की बातों को अधिक तूल देना किसी के हित में नहीं है। इस बात के लिए नोटिस देकर गलती की गई है।
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