आरक्षण नीति पर पुनर्विचार और समग्र समाधान की आवश्यकता

हम किसी भी प्रकार के आरक्षण के खिलाफ रहे हैं, पहले भी थे और आज भी हैं। आरक्षण पूरी तरह समाप्त होना चाहिए। वर्तमान समय में जो यूजीसी के नियम बनाए गए हैं, वे गलत हैं, इन पर फिर से विचार होना चाहिए। हम लगातार इस संबंध में जन-जागृति कर रहे हैं कि आरक्षण तात्कालिक दवा हो सकती है, लेकिन दीर्घकालिक रूप से बहुत अधिक घातक है। आरक्षण शुरू करने के समय ही और अधिक सावधान रहना चाहिए था, लेकिन नेहरू और अंबेडकर ने इस आरक्षण को बिगाड़ दिया।

अब हम संघ और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक साथ बैठकर आरक्षण का समाधान करेंगे। विपक्ष से भी हम आरक्षण के मामले में बैठकर विचार-मंथन करेंगे और यदि विपक्ष सहमत हो जाएगा, तब तो हम तत्काल इसमें बदलाव करेंगे, अन्यथा यदि असहमत होगा तो उसके खत्म होने या जन-जागरण होने तक हम प्रतीक्षा करेंगे।

कुछ मुट्ठी भर अंबेडकरवादियों ने आरक्षण के नाम पर बहुत अत्याचार किए हैं, इसका भी हम ख्याल रखेंगे, लेकिन हम इस बात का भी ध्यान रखेंगे कि आरक्षण की लड़ाई किसी भी परिस्थिति में मुस्लिम संघर्ष में बाधक न हो। कहीं इस आरक्षण की लड़ाई के कारण यदि हिंदुओं में विभाजन का खतरा दिखता है, तो हम इस संबंध में भी सावधान रहेंगे।

हम इस बात के लिए भी सावधान रहेंगे कि आरक्षण खत्म करने के नाम पर फिर से स्वर्ण-श्रेष्ठ की बीमारी खड़ी न हो जाए। एक बीमारी खत्म हो और दूसरी बीमारी बढ़ जाए, यह भी अच्छा नहीं है। इसलिए हम इस बात के लिए सावधान रहेंगे कि जन्मना जाति व्यवस्था को हम कर्मणा में बदल दें।

हम इस बात का भी ध्यान रखेंगे कि आरक्षण श्रम-शोषण का अधिकार न बना रहे। हम श्रम के संबंध में भी सावधान रहेंगे। इसलिए हम संघ और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस्लाम, जन्मना जाति, श्रम-शोषण—इन सबको ध्यान में रखते हुए आरक्षण समाप्त करने का फार्मूला तैयार कर रहे हैं।