नई समाज व्यवस्था का क्रमिक दृष्टिकोण
28 अप्रैल प्रातःकालीन सत्र। हम नई समाज व्यवस्था पर चर्चा कर रहे हैं। हम वर्तमान समाज व्यवस्था की सिर्फ आलोचना ही नहीं करते, बल्कि हम विकल्प भी देते हैं। लेकिन वर्तमान समाज व्यवस्था और राजनीतिक व्यवस्था में यदि कुछ गलतियां हैं, तो हम उनकी समीक्षा भी करते हैं, आलोचना भी करते हैं, लेकिन हम उस व्यवस्था का अंध विरोध नहीं करते, क्योंकि यदि हम उसका विरोध करेंगे तो पुरानी सड़ी-गली व्यवस्था उसकी जगह आ सकती है। हम जानते हैं कि सब कुछ पुराना आदर्श नहीं है, उसमें संशोधन की जरूरत है। सब कुछ नया भी आदर्श नहीं है, उसमें अनेक प्रकार की गड़बड़ियां हैं। इसलिए हम पुराने और नए को एक साथ मिलाकर एक नया प्रारूप प्रस्तुत कर रहे हैं। इसलिए हम हमेशा सावधान रहते हैं कि हम वर्तमान व्यवस्था की कमजोरी पर समाज का ध्यान आकृष्ट करें, लेकिन अंध विरोध न करें। हम एक आदर्श समाज व्यवस्था का प्रारूप समाज के सामने प्रस्तुत करें। प्रतिदिन प्रातःकालीन सत्र में हम आदर्श समाज व्यवस्था के प्रारूप पर चर्चा करते हैं और बाद में दिनभर हम वर्तमान सामाजिक या राजनीतिक व्यवस्था की आलोचना या प्रशंसा करते हैं। हमें इस बात का गर्व है कि हम यह सभी कार्य एक साथ संपन्न कर रहे हैं। हमें इस बात का भी गर्व है कि दुनिया में एकमात्र हमारे साथी ही हैं, जो इस दिशा में बहुत सतर्क और सक्रिय हैं।
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