बंगाल, असम, केरल और तमिलनाडु चुनावों के बाद नई राजनीतिक दिशा
मैंने 72 वर्ष पहले यह कल्पना की थी कि भारत से साम्यवादी विचारधारा समाप्त हो जाएगी और इस्लामिक कट्टरवाद भी नियंत्रित रहेगा। वर्तमान बंगाल, असम, केरल और तमिलनाडु के चुनावों ने वह चक्र लगभग पूरा कर दिया है। अब साम्यवाद अंतिम सांस गिन रहा है। मुस्लिम कट्टरवाद भी नियंत्रण में आ गया है। अब सिर्फ पंजाब का खालिस्तान उग्रवाद बचा है, वह भी जल्दी ही समाप्त हो जाएगा। हम लोगों के सपने का पहला चक्र पूरा हो गया है। अब हम अपने स्वप्न के दूसरे चक्र की शुरुआत करते हैं।
अब तक हम नरेंद्र मोदी, मोहन भागवत और योगी आदित्यनाथ का आंख बंद करके समर्थन करते रहे। अब हम आंख खोलकर समर्थन करेंगे। अब हम सरकार से यह भी उम्मीद करेंगे कि सरकार लोक स्वराज, समान नागरिक संहिता, अपराध नियंत्रण और श्रम सम्मान वृद्धि की दिशा में कुछ ठोस कदम उठाए। क्योंकि सरकार की गति में बाधा पहुंचाने वाले साम्यवादी और सांप्रदायिक मुसलमान अब रास्ते से किनारे दिखाई दे रहे हैं।
इस संबंध में स्पष्ट रूप से हम सरकार से तीन बातें चाहते हैं। पहली बात, परिवार को संवैधानिक मान्यता दी जाए। दूसरी बात, देश में समान नागरिक संहिता का पहला चरण तत्काल लागू किया जाए। दूसरा, तीसरा और चौथा चरण अगले चुनाव के बाद लागू किया जा सकता है। तीसरी मांग है कि अन्य सभी प्रकार के टैक्स हटाकर सारा खर्च कृत्रिम ऊर्जा पर डाल दिया जाए।
हम निरंतर इस संबंध में जन-जागरण भी करेंगे और सरकार से मांग भी करते रहेंगे, क्योंकि निकट भविष्य में सरकार को दो-तिहाई बहुमत भी मिल जाएगा और सरकार संविधान में संशोधन करने के लिए सक्षम हो जाएगी।
आज मैंने लिखा था कि वर्तमान पांच विधानसभाओं के चुनावों ने व्यवस्था परिवर्तन का पहला चक्र सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। अब दूसरा चक्र प्रारंभ हो सकता है। इस दूसरे चक्र में हम सरकार से तीन प्रकार की उम्मीद कर रहे हैं। पहली है कि परिवार व्यवस्था को संवैधानिक मान्यता दी जाए। दूसरी है कि समान नागरिक संहिता का पहला चरण शीघ्र लागू किया जाए। तीसरी है कि सभी प्रकार के टैक्स हटाकर सारा टैक्स कृत्रिम ऊर्जा पर डाल दिया जाए।
परिवार व्यवस्था पर हम लगातार चिंतन-मंथन कर रहे हैं। सरकार को भी इस दिशा में सक्रिय होना चाहिए और परिवारों को संवैधानिक मान्यता तथा कुछ संवैधानिक अधिकार दिए जाएं।
समान नागरिक संहिता का पहला चरण शीघ्र लागू कर दिया जाए। दूसरा चरण जन्मना जाति व्यवस्था के समापन का होगा। इस दिशा में भी सरकार को चिंतन शुरू कर देना चाहिए। तीसरा चरण लिंगभेद समापन का होगा। यह चरण अभी देर से उठाया जा सकता है। चौथा चरण गरीब और अमीर के बीच भेद समाप्त करने का होगा। यह अभी दूर की बात है। इन चार चरणों में समान नागरिक संहिता लागू होनी चाहिए।
हम टैक्स प्रणाली की बात कर रहे हैं। इसमें भी प्रथम चरण में हम चाहते हैं कि जीएसटी को पूरी तरह समाप्त करके उसका पूरा खर्च कृत्रिम ऊर्जा पर डाल दिया जाए, जो संभवतः 25 प्रतिशत मूल्य वृद्धि से पूरा हो सकता है। उसके बाद दूसरे और तीसरे चरण की चर्चा होगी। इस तरह व्यवस्था परिवर्तन का राजनीतिक स्वप्न पूरा होना शुरू हो जाएगा। इसके लिए जो भी आवश्यकता पड़े, उस प्रकार का संविधान संशोधन किया जाना चाहिए।
जल्दी ही भारत अपनी सरकार को दो-तिहाई बहुमत देने के लिए सहमत होगा।
Comments