राहुल गांधी की बयानबाज़ी और विपक्ष के भविष्य पर उठते सवाल

 

जिस विपक्ष का सबसे बड़ा नेता राहुल गांधी सरीखा नासमझ हो, उस विपक्ष का भविष्य क्या होगा, आप खुद ही सोच सकते हैं। आप विचार करिए कि तीन-चार महीने पहले ही राहुल गांधी ने यह बात देश को बताई थी कि ट्रंप के दबाव में नरेंद्र मोदी ने देश के साथ समझौता कर लिया है। देशभर में राहुल गांधी को छोड़कर और किसी को इस बात पर विश्वास नहीं हुआ था, लेकिन अभी दो-तीन दिन पहले ही राहुल गांधी ने एक उल्टी बात कही। राहुल गांधी ने यह रहस्य बताया कि नरेंद्र मोदी के दबाव में ट्रंप ने अंबानी का मुकदमा वापस लेने की योजना बनाई है। मैं मानता हूं कि राहुल गांधी को इस योजना से बहुत कष्ट हुआ होगा, क्योंकि बड़ी मुश्किल से सोरोस और हिंडनबर्ग वर्ग के साथ किसी योजना के अंतर्गत अडानी को घेरा गया था। यह मान लिया गया था कि अडानी बर्बाद हो जाएंगे, लेकिन अडानी बच गए, सोरोस और हिंडनबर्ग ही संकट में आ गए हैं। ऐसे समय में यदि अडानी पर से मुकदमे वापस हो रहे हैं, तो राहुल गांधी को स्वाभाविक रूप से कष्ट होगा, लेकिन यह मुकदमे वापस करने के लिए नरेंद्र मोदी का दबाव ट्रंप ने मान लिया, यह बात समझ में नहीं आई। झूठ बोलने की भी कोई सीमा होती है और राहुल गांधी को इस तरह की झूठी बातें बोलने से बचना चाहिए, क्योंकि इस समय भारत में राजनेताओं में झूठ बोलने वालों में राहुल गांधी का ही नाम सबसे ऊपर है। अब मुट्ठी भर राहुल भक्तों को छोड़कर देश का कोई भी व्यक्ति राहुल गांधी की बात पर भरोसा नहीं करता।