सामाजिक चर्चा : महंगाई, सामाजिक विमर्श और राष्ट्रहित की दिशा

भारत में महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, पर्यावरण प्रदूषण, मानवाधिकार तथा कुछ अन्य ऐसी ही बेसिर-पैर की समस्याओं को आगे लाकर हमें गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। जो भी लोग इस दिशा में सक्रिय हैं, उनकी नीयत खराब है। वे सांप्रदायिकता की वास्तविक समस्या से हमारा ध्यान हटाना चाहते हैं।

भारत में लगातार गरीबी घट रही है। महंगाई तो है ही नहीं। बेरोजगारी भी लगभग खत्म है। पर्यावरण प्रदूषण भी अपने आप निपट रहा है। भारत की विकास दर सामान्य है और अगर एक-दो प्रतिशत कम-ज्यादा भी होगी तो वह बड़ी चिंता का विषय नहीं है। लेकिन सांप्रदायिकता और विशेषकर मुस्लिम तुष्टिकरण हमारे लिए एक बहुत बड़ी समस्या है।

अब हम भारत के किसी नए विभाजन का खतरा नहीं झेल सकते। इसलिए हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है कि हम मुस्लिम सांप्रदायिकता की कमर तोड़ दें। इसके लिए जो भी करना पड़े, वह सब कुछ किया जाए।

महंगाई, गरीबी, अशिक्षा और बेरोजगारी की बेकार की बातें करने वालों का हम सामाजिक बहिष्कार करें, क्योंकि ये सब लोग हमारा मार्ग भ्रमित करना चाहते हैं।