वोट बैंक की रणनीति और बदलता राजनीतिक संतुलन
भारत के वर्तमान राजनीतिक वातावरण को देखते हुए विपक्ष को यह बात अच्छी तरह समझ में आ गई है कि अब भारत के हिंदुओं से उसे कोई विशेष उम्मीद नहीं है। धीरे-धीरे पूरा हिंदू समाज एकजुट होता जा रहा है। अब तो कई कम्युनिस्ट हिंदू भी धीरे-धीरे कुछ अलग भाषा बोलने लगे हैं।
ऐसी स्थिति में कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों ने अपनी सारी उम्मीदें मुसलमानों और ईसाइयों पर केंद्रित कर दी हैं। वे इस बदलाव में विदेशी मुसलमानों को भी अपने साथ जोड़कर देखना चाहते हैं, क्योंकि विपक्षी दलों को ऐसा अंदाज हो गया है कि विदेशी हिंदू भी भारत के हिंदुओं के साथ खड़े हो जाएंगे। इसलिए मजबूरी समझकर विपक्ष हिंदू-मुसलमान का विभाजन कर रहा है।
अब भारतीय राजनीति में विपक्ष को ऐसा लगता है कि पूरा उत्तर भारत उसे साफ कर रहा है। उत्तर भारत से कांग्रेस पार्टी तथा अन्य विपक्षी दल लगभग उम्मीद खो चुके हैं, इसलिए अब विपक्ष दक्षिण भारत पर ही पूरी ताकत लगा रहा है।
कांग्रेस पार्टी तथा अन्य विपक्षी दल अब उत्तर-दक्षिण का विभाजन करना चाहते हैं। इसी विभाजन की कड़ी में कल का महिला सशक्तिकरण बिल भी भेंट चढ़ गया, क्योंकि विपक्ष किसी भी परिस्थिति में अब दक्षिण भारत को अपने हाथ से नहीं निकलने देना चाहता।
मैं मानता हूँ कि यह विपक्ष की एक मजबूरी हो सकती है, लेकिन यह देश के लिए बहुत घातक है कि भारतीय राजनीति हिंदू-मुसलमान, उत्तर भारत और दक्षिण भारत के बीच विभाजित हो और विपक्ष इस आधार पर राजनीति करे। हमें विपक्ष की खुलकर निंदा करनी चाहिए।
Comments