ट्रंप और मोदी : मेहर दीन–चंदगी राम की कुश्ती के संदर्भ में
मुझे मेहरदीन और चंदगी राम के बीच 30-40 वर्ष पहले हुई कुश्ती अच्छी तरह याद है। मेहरदीन एक बहुत ही मजबूत मुसलमान था, शरीर से बहुत मजबूत था। मांस भी बहुत खाता था, पानी भी बहुत पीता था और मेहरदीन इतना अधिक ताकतवर था कि वह चंदगी राम सरीखे एक दुबले-पतले व्यक्ति को मसल देता और उसकी हड्डी का पता नहीं चलता। चंदगी राम हरियाणा का एक शाकाहारी, दुबला-पतला पहलवान था और दोनों के बीच में कोई मुकाबला नहीं दिखता था। सत प्रतिशत लोग यह समझते थे कि मेहरदीन आसानी से चंदगी राम को पटक देगा, लेकिन चंदगी राम अखाड़े में सिर्फ मेहरदीन को दौड़ाते रहे। कहीं पकड़ में नहीं आए, कहीं टकराए नहीं। मेहरदीन के समर्थक बार-बार ललकार रहे थे कि पकड़ो, टकराओ, लेकिन चंदगी राम कहीं जोश में नहीं आए। परिणाम हुआ कि थोड़ी देर में मेहरदीन थक गया, अपने आप गिर गया, चंदगी राम कुश्ती जीत गए।
मुझे यह भी याद है कि वह कुश्ती जीतने के बाद इंदौर में हिंदू-मुसलमान का एक बहुत बड़ा दंगा हुआ था, लेकिन वह दंगा मेरी चर्चा का विषय नहीं है। मैं तो यह चर्चा करना चाहता हूं कि अमेरिका का राष्ट्रपति ट्रंप और भारत का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दोनों की तुलना इसी तरह की जा सकती है। ट्रंप को आप मेहरदीन के समान ताकतवर मान सकते हैं और नरेंद्र मोदी को चंदगी राम के समान हरियाणा का एक दुबला-पतला, कमजोर पहलवान। राहुल गांधी ललकार रहे हैं कि भिड़ो ट्रंप से, लेकिन नरेंद्र मोदी सिर्फ ट्रंप को दौड़ा रहे हैं और आपने देखा होगा कि अब ट्रंप का व्यवहार कितना बदल गया है। मेहरदीन और चंदगी राम की कुश्ती वर्तमान समय में ट्रंप और नरेंद्र मोदी के साथ फिट बैठती है।
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