परीक्षा विवाद और आत्महत्या पर गंभीर विमर्श
परीक्षा में हुई नकल और दोबारा परीक्षा को लेकर विपक्ष का धरना-प्रदर्शन जारी है। विपक्ष की एक मांग है कि दोबारा परीक्षा के पहले जिन 20 छात्रों ने आत्महत्या कर ली थी, उन्हें भरपूर मुआवजा दिया जाए और उन्हें शहीद माना जाए।
एक गंभीर प्रश्न खड़ा होता है कि लाखों छात्रों में से इन 20 छात्रों ने आत्महत्या क्यों की। यह भी संभव है कि उन्हें दोबारा फेल होने का डर हो। यह भी संभव है कि पहली परीक्षा में उन्होंने नकल करके या किसी अन्य तिकड़म से परीक्षा दे दी हो और दोबारा वैसी संभावना न दिख रही हो। कोई और भी कारण हो सकते हैं, जिनके कारण उन लोगों ने आत्महत्या की।
अन्यथा कई लाख बच्चों ने, जिन्हें यह विश्वास था कि उन्होंने योग्यता के आधार पर परीक्षा दी है, दोबारा परीक्षा दी, जबकि गिने-चुने छात्रों ने परीक्षा देने की अपेक्षा आत्महत्या कर ली।
अब प्रश्न यह खड़ा होता है कि क्या आत्महत्या करने वालों को किसी तरह का मुआवजा देना चाहिए? यदि इस तरह आत्महत्याओं को प्रोत्साहित किया गया, तो क्या यह किसी सरकार का सही कदम होगा? क्या यह छात्रों की उचित मांग है? इस पर गंभीरता से सोचा जाना चाहिए।
मैं तो इस मत का हूँ कि किसी भी आत्महत्या को किसी भी तरह से ग्लोरिफाई करना या प्रोत्साहित करना एक गलत कदम है। संकटों का मुकाबला करने वालों को प्रोत्साहित करना चाहिए। संकटों से भागकर आत्महत्या करना कोई समाधान नहीं है। मैं छात्रों और सरकार की इस तरह की किसी भी योजना का विरोध करता हूँ।
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