लोकस्वराज में न्याय और व्यवस्था का संतुलन
लोकतंत्र और तानाशाही में एक बहुत बड़ा फर्क यह होता है कि तानाशाही में व्यवस्था बहुत मजबूत होती है और न्याय कमजोर हो जाता है। लोकतंत्र में न्याय बहुत मजबूत हो जाता है और व्यवस्था कमजोर हो जाती है। यही कारण है कि लोकतंत्र में लगभग अराजकता रहती है।
हम नई व्यवस्था में इस तरह का प्रस्ताव दे रहे हैं कि व्यवस्था का आकलन करके ही न्याय घोषित किया जाए। किसी भी परिस्थिति में व्यवस्था की तुलना में न्याय की घोषणा अधिक न हो, क्योंकि अराजकता का मुख्य कारण यही होता है कि लोकप्रियता के लिए बिना व्यवस्था का आकलन किए लोगों को आश्वासन दे दिए जाते हैं, उम्मीदें बढ़ा दी जाती हैं और व्यवस्था ओवरलोड हो जाती है, जिसका परिणाम होता है अव्यवस्था।
इसलिए नई व्यवस्था में इस बात का पूरा-पूरा ध्यान रखा जाएगा। हम जो लोकस्वराज्य की व्यवस्था बना रहे हैं, उसमें व्यवस्था और न्याय के बीच एक अच्छा संतुलन बनाकर रखा जाएगा। स्पष्ट है कि हम न्याय की घोषणा को कम कर देंगे और व्यवस्था को मजबूत करेंगे।
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