संघ की बढ़ती ताकत का रहस्य

सारी दुनिया का वर्तमान वातावरण देखकर मुझे ऐसा लगता है कि दुनिया के लगभग सभी राजनीतिक दल और मीडिया संघ के आलोचक या विरोधी हैं। भारत में भारतीय जनता पार्टी भी आंशिक रूप से संघ की प्रशंसा करती है, अन्यथा उसे भी इसकी फुर्सत नहीं है। बाकी तो लगभग सभी लोग संघ की आलोचना करने वाले ही हैं, भले ही वे उद्धव ठाकरे ही क्यों न हों।

मीडिया में भी संघ की आलोचना ही अधिक दिखाई देती है। सोशल मीडिया में भी संघ के प्रशंसकों की संख्या अपेक्षाकृत कम दिखाई देती है। कम्युनिस्ट, कांग्रेस और सोशलिस्ट दल तो दिन-रात संघ की आलोचना करते ही रहते हैं। लेकिन आश्चर्य होता है कि संघ लगातार भारत में बढ़ता जा रहा है। संघ के स्वयंसेवकों और समर्थकों की संख्या भी बढ़ रही है तथा उसकी ताकत भी लगातार बढ़ रही है।

मैंने इसके कारणों पर विचार किया तो मुझे यह बात समझ में आई कि संघ मीडिया से दूरी बनाकर रहता है, सोशल मीडिया का भी सीमित उपयोग करता है और हवाई प्रचार पर विश्वास नहीं करता। जहाँ एक तरफ संघ के विरोधी जंतर-मंतर, प्रदर्शन, धरना और आंदोलन का सहारा लेते हैं, वहीं संघ चुपचाप व्यक्तिगत संपर्कों के माध्यम से मैदानी प्रचार करता है।

मेरे विचार से यह एक महत्वपूर्ण कारण है कि संघ की ताकत लगातार बढ़ती जा रही है, जबकि उसके विरोधियों का प्रचार भी लगातार बढ़ता जा रहा है। हवाई आक्रमण की शक्ति और मैदानी आक्रमण की शक्ति में जो अंतर होता है, वही अंतर संघ और उसके विरोधियों के बीच प्रत्यक्ष दिखाई देता है।

एक तरफ राहुल गांधी वर्षों तक संसद नहीं चलने देने की रणनीति अपनाते हैं और दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी दो-तिहाई बहुमत की दिशा में बढ़ रहे हैं। यही, मेरे विचार से, संघ की सफलता का राज है।