अविमुक्तेश्वरानंद और शंकराचार्य व्यवस्था पर उठते प्रश्न...
मैं कई वर्षों से यह अनुभव कर रहा था कि शंकराचार्य प्रणाली अब हिंदू समाज पर एक प्रकार का बोझ बनती जा रही है। चा...
मैं कई वर्षों से यह अनुभव कर रहा था कि शंकराचार्य प्रणाली अब हिंदू समाज पर एक प्रकार का बोझ बनती जा रही है। चा...
कल मैंने नीतीश कुमार की चर्चा की थी। मेरा अब भी यह मानना है कि मनमोहन सिंह के बाद वर्तमान भारत में सबसे अधिक ल...
30 जनवरी, प्रातः कालीन सत्रहम इस निष्कर्ष तक पहुँच चुके हैं कि भारत में कुल 11 ऐसी समस्याएँ हैं जो स्वतंत्रता ...
उपराष्ट्रपति धनकर के त्यागपत्र ने पूरे देश में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। आखिर ऐसी परिस्थितियों कैसे पैदा ह...
2 जुलाई प्रभात सत्र: स्वार्थ और संपत्ति व्यवस्था पर विचार पिछले कुछ वर्षों में विश्व भर में स्वार्थ की प्रवृत...
पूंजीवाद, समाजवाद और साम्यवाद कुछ सर्वस्वीकृत सिद्धांत हैं- 1 न्याय और व्यवस्था एक दूसरे के पूरक होते है । द...