सोनी परिवार के साथ हुई घटना समाज और कानून दोनों के लिए चेतावनी
रायपुर शहर की पुरानी बस्ती में एक सोनी परिवार के लड़के की मृत्यु हो गई थी। इस मृत्यु के दुख से प्रभावित होकर उसकी माँ ने भी कुछ समय बाद आत्महत्या कर ली। उस आत्महत्या का सारा दोष ससुराल वालों ने उस लड़के के पिता पर डाल दिया कि पिता ने ही दहेज के लिए माँ को कष्ट दिया और इसलिए माँ ने आत्महत्या कर ली। एक वर्ष तक अत्यंत दुखी रहने के बाद उस सोनी ने भी कल आत्महत्या कर ली। एक तरफ बेटे की मृत्यु, दूसरी तरफ पत्नी की मृत्यु और तीसरी तरफ दहेज का लांछन — वह यह सब सहन नहीं कर सका।
इस तरह की घटना कोई एक घटना नहीं है। अभी आप दिशा के मामले में भी इसी तरह की बातें सुन रहे हैं। यदि आप अखबार देखते हैं, तो हर दो-चार दिन में आपको ऐसी घटना मिल ही जाएगी, जबकि इस प्रकार की 90% घटनाएँ असत्य होती हैं। यह एक चिंता का विषय है और शोध का भी विषय है कि ससुराल पक्ष में यदि किसी लड़की की मृत्यु हो जाती है, तो उसके माता-पिता ससुराल पक्ष पर झूठा लांछन लगाते ही हैं।
कुछ वर्ष पहले तक लड़कियों को माँ-बाप अमानत समझते थे और उन्हें ससुराल भेज देते थे, लेकिन वर्तमान में लड़कियों के माता-पिता उन्हें संपत्ति समझते हैं। उस समय लड़की वाले दहेज देते थे और अब लड़के वाले अधिक खर्च करते हैं। इसके बाद भी लड़के वाले हमेशा चिंतित रहते हैं कि पता नहीं कब क्या घटना हो जाए, क्योंकि अब लड़कियाँ ससुराल में अमानत नहीं मानी जातीं।
यह हमारी संस्कृति का बदलाव है और यह कानून का दोष है, जहाँ महिलाओं को विशेष अधिकार देकर उन्हें ब्लैकमेलिंग करने की छूट दी गई है। अब तो यदि किसी लड़की की ससुराल में मृत्यु हो जाए, तो लड़की के माता-पिता उस ससुराल को लूट लेना चाहते हैं, ब्लैकमेल करते हैं, सरकार से भी मदद खोजते हैं और सरकार भी उन्हें मदद करती है। बिचौलिए, मीडिया वाले, नेता और सामाजिक कार्यकर्ता — ये सब भी उस लूट के माल में हिस्सेदारी हो जाते हैं।
इस समस्या का समाधान खोजा जाना चाहिए।
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