सर्व समाज एकता: विभाजन नहीं, समरसता का अभियान

4 जुलाई प्रातःकालीन सत्र

हम सब वर्तमान समय में सिर्फ एक दिशा में सक्रिय हैं कि समाज को एकजुट होना चाहिए। सामाजिक एकजुटता में सबसे अधिक परेशान राजनीतिक नेता होते हैं क्योंकि राजनीतिक नेताओं के लिए सामाजिक एकता बहुत अधिक घातक होती है। इसलिए वे विभिन्न तरीकों से समाज में वर्ग-विद्वेष बढ़ाकर वर्ग-संघर्ष का सहारा लेते हैं। लेकिन हम सरकार की इन सारी चालाकियों को किनारे करते हुए सामाजिक एकता का पक्ष लगातार मजबूत कर रहे हैं। धीरे-धीरे इस तरह के सर्व समाज एकता में जुड़ने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। हम जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र, लिंग, गरीब, अमीर, किसान, मजदूर, भारतीय, विदेशी या अन्य किसी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं कर रहे। हम हर व्यक्ति को सामाजिक मान रहे हैं। हम सिर्फ यह प्रयत्न कर रहे हैं कि जो समाज के बनाए गए नियमों के विरुद्ध आचरण करता है, उन सबको छोड़कर बाकी सब लोगों को एकजुट कर दिया जाए। हमारा यह मानना है कि चाहे व्यक्ति एक नंबर का हो या दो नंबर का हो, यदि वह तीन नंबर के कार्य नहीं कर रहा है तो वे सब हमारे साथ जुड़ सकते हैं। इस तरह हम सर्व समाज नामक एक नई इकाई बना रहे हैं। हमारी इस इकाई को देशभर में जिस तरह समर्थन मिल रहा है, वह भी अभूतपूर्व है। इस सर्व समाज इकाई का पहला प्रांतीय सम्मेलन अयोध्या में 25 और 26 जुलाई को हो रहा है। इसी तरह देशभर के अन्य स्थानों पर भी सम्मेलन किए जाएंगे। हम जातिवाद, सांप्रदायिकता, क्षेत्रवाद, लिंगवाद का विरोध न करके हम इन सब बीमारियों से मुक्त समाज रचना का कार्य कर रहे हैं। हमें गायत्री परिवार, आर्य समाज, सर्वोदय, संघ परिवार के लोगों का अच्छा समर्थन मिल रहा है।