राजनीति-मुक्त समाज व्यवस्था: दीर्घकालिक समाधान

24 जुलाई, प्रातःकालीन सत्र

हम लगातार वर्तमान समस्याओं के दीर्घकालिक समाधान पर भी चर्चा कर रहे हैं और वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था के तात्कालिक समाधानों पर भी सरकार को सलाह दे रहे हैं। हम दोनों दिशाओं में सक्रिय हैं।

आप वर्तमान समय में देख रहे होंगे कि तीन-चार दिनों से गाँव से लेकर दिल्ली तक के सभी छोटे-बड़े राजनेता दो गुटों में बँटकर आपस में लड़ने-झगड़ने का तमाशा कर रहे हैं। न्यायपालिका भी इसमें व्यस्त हो गई है। इंटरनेट सेवाएँ रोकी जा रही हैं। सारी पुलिस व्यवस्था इनके तमाशे में व्यस्त हो गई है। देश भर का सरकारी काम अव्यवस्थित हो गया है। धरना-प्रदर्शन और नाटकबाज़ी दिनभर चल रही है और हम सब लोग इस अराजकता को देखने के लिए मजबूर हैं।

सब कुछ अच्छी तरह देखने-समझने के बाद हमने यह दीर्घकालिक सलाह दी है कि हमें राजनीति-मुक्त समाज व्यवस्था बनानी चाहिए। राजनेताओं पर निर्भरता और उनके प्रभाव को बहुत कम कर देना चाहिए। हमें समाज व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए और राजनीतिक व्यवस्था को कमजोर करना चाहिए। यही दीर्घकालिक समाधान है।

साथ ही हम तात्कालिक समाधान भी बता रहे हैं कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था में दलगत राजनीति को समाप्त कर दिया जाए। कोई भी व्यक्ति स्वतंत्रतापूर्वक अपनी बात रख सकता है। उसे किसी दल का अनुशासन मानने के लिए बाध्य नहीं होना चाहिए। आप संसद और चुनाव से बाहर अपने गुट बना सकते हैं, लेकिन संसद के भीतर और चुनाव में किसी प्रकार की गुटबाज़ी नहीं होनी चाहिए।

इस प्रकार हम तात्कालिक सुधार की भी बात कर रहे हैं।