नई समाज व्यवस्था में विधायिका की स्वायत्तता

1 अगस्त प्रातःकालीन सत्र

हम नई समाज व्यवस्था में विधायिका और कार्यपालिका को बिल्कुल अलग-अलग कर देंगे। विधायिका का कार्यपालिका पर कोई प्रत्यक्ष दबाव नहीं होगा, बल्कि दोनों स्वतंत्रता से कार्य करेंगे। विधायिका के लोग कार्यपालिका में जाकर प्रधानमंत्री या मंत्री भी नहीं बन सकेंगे। दोनों पूरी तरह अलग-अलग होंगे।

विधायिका के लोगों का यदि कोई सम्मेलन होता है या कोई विचार-विमर्श होता है, तो उसकी अध्यक्षता कार्यपालिका का कोई व्यक्ति करेगा। अर्थात यदि जिला सभा की बैठक होगी, तो उसकी अध्यक्षता कलेक्टर करेगा। अध्यक्ष को उसमें न वोट देने का अधिकार होगा, न अपनी बात रखने का अधिकार होगा। वह केवल बैठक का संचालन करेगा।

यदि ग्राम सभा की बैठक होगी, तो ग्राम सभा का सचिव बैठक की अध्यक्षता करेगा। इस प्रकार मैंने यह व्यवस्था की है कि हम विधायिका के प्रत्येक व्यक्ति को समान अधिकार देंगे। उसमें किसी को विशेष अधिकार नहीं देंगे। कार्यपालिका का व्यक्ति केवल संचालन की व्यवस्था करेगा।