आरक्षण के विवाद से निकलने के लिए तीसरे मार्ग की तलाश
मैं शुरू से ही आरक्षण के विरुद्ध रहा हूँ। मैं गांधी को मानने वाला हूँ और गांधी भी किसी तरह के आरक्षण के पक्ष में नहीं थे। गांधी भी चाहते थे कि सबको योग्यता के अनुसार काम मिले, लेकिन अंबेडकर की जिद ने एक आरक्षण का प्रावधान लागू कर दिया था और अंबेडकरवादियों ने ब्लैकमेल करके इस आरक्षण के प्रावधान को लगातार मजबूत किया, जिसे नेहरू परिवार का पूरा-पूरा समर्थन मिला और आज भी मिल रहा है। इसलिए आरक्षण के विरुद्ध यदि कोई आंदोलन होता है तो मैं उस आंदोलन के खिलाफ नहीं हूँ। अंबेडकरवादियों को ब्लैकमेलिंग से रोका ही जाना चाहिए। फिर भी मैं ऐसे किसी आंदोलन में अभी सहयोग नहीं करूँगा, क्योंकि यदि अंबेडकरवादियों के विरुद्ध फिर से कोई सवर्ण-अवर्ण, उच्च-नीच का मार्ग खुलता है तो वह भी कोई अच्छा मार्ग नहीं है। इस तरह दो ब्लैकमेलर अगर आपस में लड़ते हैं तो एक तीसरा मार्ग निकल सकता है। इसलिए इस आरक्षण के विरुद्ध आंदोलन को बढ़ाने की जरूरत है, जिससे आरक्षण के मामले में कोई एक नया मार्ग निकल सके। मैं चाहता हूँ कि आरक्षण के विरोध में यह आंदोलन और मजबूत हो, जिससे अंबेडकरवादियों की शक्ति कम हो जाए और समाज के सभी वर्गों के लोग एक साथ बैठकर आरक्षण के मामले में कुछ नया सोच सकें।
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