नई व्यवस्था में ग्राम पंचायतों के माध्यम से मामलों का निपटारा
2 सितंबर प्रातःकालीन सत्र।
सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय पर बहुत चिंता व्यक्त की है कि मुकदमों की बढ़ती हुई संख्या बहुत अधिक हो गई है। न्यायपालिका में स्टाफ की कमी है। मैं भी मानता हूँ कि न्यायपालिका में स्टाफ की कमी है, लेकिन मैं यह नहीं मानता कि न्यायपालिका के पास मुकदमों की संख्या बढ़ाने में न्यायपालिका की गलती नहीं है। मेरे विचार से न्यायपालिका ने अनावश्यक मुकदमों की बाढ़ पैदा की है। जनहित याचिकाएँ न्यायपालिका को नहीं सुनना चाहिए। अन्य अनेक मामले जो न्यायपालिका के दायित्व में नहीं आते, वे मामले न्यायपालिका बेकार सुनती है। कार्यपालिका और विधायिका के सारे कार्य न्यायपालिका ले लेती है, यह पूरी तरह गलत है।
हम नई व्यवस्था में मुकदमों की संख्या बहुत कम कर देंगे। सारे मामले या तो ग्राम पंचायत में निपटाए जाएंगे अथवा ग्राम पंचायत की अपील जिला पंचायत में होगी। कोई भी अपराध यदि ग्राम सभा निपटा देता है तो ग्राम सभाओं को अधिकार दिया जाएगा। आपस में मिलकर कोई भी मामला निपटाया जा सकता है, चाहे वह यदि पुलिस का भी मामला हो तो पुलिस और संबंधित पक्ष आपस में बैठकर निपट सकते हैं।
नई व्यवस्था में किसी भी एफआईआर के पहले पुलिस सच्चाई की जाँच करेगी और उसके बाद ही मुकदमा दर्ज करेगी। नई समाज व्यवस्था में पुलिस जिसे अपराधी घोषित कर देगी, वह व्यक्ति न्यायालय में अपील कर सकता है और उसे अपने को निर्दोष सिद्ध करना होगा। उसमें पुलिस की भूमिका नहीं रहेगी। इस तरह नई व्यवस्था में मुकदमे कम हो जाएंगे।
वर्तमान समय में हम न्याय व्यवस्था में जो पश्चिमी जगत की नकल कर रहे हैं, उसे बंद करने की जरूरत है। अब हम भारत के लोग अपनी एक नई न्याय व्यवस्था बनाएंगे और दुनिया के सामने आदर्श प्रस्तुत करेंगे।
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