कलयुग से सतयुग की ओर: संशोधित सामाजिक व्यवस्था का संकल्...
वर्तमान दुनिया में ऐसा माना जा रहा है कि कलयुग आ गया है और कलयुग का अंतिम चरण है। मान लीजिए कि यदि कलयुग आ भी ...
वर्तमान दुनिया में ऐसा माना जा रहा है कि कलयुग आ गया है और कलयुग का अंतिम चरण है। मान लीजिए कि यदि कलयुग आ भी ...
लोकतंत्र में व्यवस्था से ही चरित्र बनता है, चरित्र से व्यवस्था नहीं बनती। दुर्भाग्यवश हम अक्सर यह कल्पना करने ...
व्यक्ति और समाज—ये दोनों प्राकृतिक इकाइयाँ हैं। दोनों के अपने-अपने मौलिक अधिकार होते हैं...
वर्तमान समाज व्यवस्था में पूरी दुनिया में, और विशेषकर भारत में, शिक्षा को बहुत अधिक महत्व दिया जा रहा है। शिक्...
नई समाज व्यवस्था में हम इस बात के लिए समाज में जन-जागरण फैलाएँगे कि भूत-प्रेत, तंत्र-मंत्र आदि...
10 मार्च, प्रातःकालीन सत्र।राज्य व्यवस्था समाज को अपने नियंत्रण में बनाए रखने के लिए लोकतांत्रिक तरीकों से कई ...
12 मार्च, प्रातःकालीन सत्र हम पिछले कई दिनों से इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं कि राज्य समाज को ...
2 दिन पहले ही होली का त्योहार संपन्न हुआ है। भारत में इस समय एक बहस छिड़ गई है कि क्या होली शूद्रों का त्योहार...
9 मार्च, प्रातःकालीन सत्र।हम समाज में राज्य की वर्तमान भूमिका पर चर्चा कर रहे हैं। राज्य अक्सर समाज में &ldquo...
7 मार्च, प्रातःकालीन सत्र।राज्य लोकतांत्रिक तरीकों से समाज को नियंत्रित या गुलाम बनाने के लिए जिन उपायों का उप...
स्पष्ट दिखाई देता है कि राज्य अक्सर समाज को नियंत्रित करने के लिए धर्मगुरुओं का उपयोग करता है,...
राज्य कभी भी समाज के वास्तविक अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता। राज्य व्यक्ति के अस्तित्व को तो स्वीकार करता है, ...
समाज को गुलाम बनाकर रखने के लिए राज्य किस प्रकार की योजनाएँ बनाता है, इस विषय पर हम लगातार चर्चा कर रहे हैं। इ...
मैंने अपने जीवन में जो भी भविष्यवाणियाँ की हैं, उनमें से लगभग सभी सच सिद्ध हुई हैं। मैंने लगभग सत्तर वर्ष पहले...
लोकतांत्रिक व्यवस्था में राज्य की यह मजबूरी हो जाती है कि वह जनहित की अपेक्षा लोकप्रियता को अध...
दुनिया भर के लोकतांत्रिक देशों की सरकारें समाज को अपने प्रभाव में बनाए रखने के लिए अनेक लोकप्रिय व्यवस्थाएँ अप...
23 फरवरी, प्रातःकालीन सत्र माँ संस्थान के पाँच दिवसीय शिविर में हम तीन संस्थानों पर चर्चा कर चुके हैं। इनमें ...
24 फरवरी, प्रातःकालीन सत्र पाँच दिनों के इस रामानुजगंज शिविर में हमने गंभीरतापूर्वक इस विषय पर चर्चा की कि रा...
6 फरवरी – प्रातःकालीन सत्रहम नई समाज व्यवस्था पर निरंतर चर्चा कर रहे हैं। इस नई समाज व्यवस्था के संदर्भ ...
2 फरवरी : प्रातःकालीन सत्रहम लंबे समय से आरक्षण के समाधान की चर्चा में उलझे हुए हैं। यह सत्य है कि स्वतंत्रता ...
वर्तमान दुनिया में ट्रंप जिस प्रकार का व्यवहार कर रहे हैं, वह पूरी दुनिया के लिए एक तात्कालिक संदेश है। ट्रंप ...
जौनपुर (उत्तर प्रदेश) में हाल ही में एक अत्यंत विचलित करने वाली घटना सामने आई, जहाँ एक सामान्य व्यक्ति ने मेडि...
30 जनवरी, प्रातः कालीन सत्रहम इस निष्कर्ष तक पहुँच चुके हैं कि भारत में कुल 11 ऐसी समस्याएँ हैं जो स्वतंत्रता ...
28 जनवरी, प्रातःकालीन सत्रहम नई समाज व्यवस्था में बेरोजगारी की वर्तमान परिभाषा को पूरी तरह बदल देंगे। हमारे आध...
हमारी समाज व्यवस्था स्पष्ट रूप से गलत दिशा में जा रही है। महिला और पुरुष के बीच आपसी संबंध कैसे हों—यह त...
24 जनवरी : प्रातःकालीन सत्र भारत में शंकराचार्य का प्रश्न अब अत्यंत विवादास्पद हो गया है। दुनिया में हिंदू धर...
22 जनवरी, प्रातःकालीन सत्रसमाज, तंत्र और व्यक्ति—इन तीनों के बीच अलग-अलग भूमिकाएँ होती हैं। तंत्र समाज क...
मैं प्रतिदिन तीन–चार पोस्ट लिखता हूँ। इनमें से प्रातःकाल मैं नई समाज-व्यवस्था को लेकर अपनी कल्पना पर लिख...
14 जनवरी प्रातःकालीन सत्रसंक्रांति की बेला में हम नई समाज-व्यवस्था पर चर्चा कर रहे हैं। यह समाज-व्यवस्था पूरी ...
आज का अख़बार पढ़ने पर लगभग हर पृष्ठ पर एक-दो हत्याओं का विवरण था। ये हत्याएँ केवल रायपुर के आसपास ही नहीं, बल्...
मैं आज प्रातःकाल से समाज-सशक्तिकरण के प्रश्न पर विचार कर रहा हूँ। हाल ही में नीतीश कुमार द्वारा एक महिला डॉक्ट...
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सत्र में हम नई समाज-व्यवस्था पर चर्चा कर रहे हैं। यह एक गंभीर विषय है कि नई समाज-व्यवस्था पूर्णतः लोकतांत्रिक ...
15 नवंबर, प्रातःकालीन सत्र हम प्रतिदिन सुबह नई समाज व्यवस्था पर चर्चा करते हैं। मैं अपने जीवन के अनुभव इसी प्...
14 नवंबर — प्रातःकालीन सत्र नई व्यवस्था में समाज व्यवस्था और राज्य व्यवस्था को स्पष्ट रूप से अल...
13 नवंबर प्रातः कालीन सत्र। नई समाज व्यवस्था पर चर्चा। ...
भारत: मानव सभ्यता की जननी भारत को मानव सभ्यता की जननी कहा जाता है। इसका अर्थ है कि सभ्यता का प्रारम्भ यहीं ...
हम लोगों का पूरा का पूरा ग्रुप वर्तमान समस्याओं की चर्चा तक सीमित नहीं है हम इन चर्चाओं का कुछ समाधान भी बताना...
नई राजनीतिक व्यवस्था में नकद सब्सिडी प्रस्ताव 6 जुलाई 2025, प्रातःकालीन सत्र में हम वर्तमान राजनीतिक और सामाज...
1 जुलाई, प्रातःकालीन सत्र। धर्म और विज्ञान समाज में हमेशा एक-दूसरे के पूरक रहे हैं। विज्ञान अनुसंधान करता है,...
परम्परा और आधुनिकता के संघर्ष में अंधानुकरण उचित नहीं: वर्तमान दुनिया में परंपरागत या आधुनिक इन दो विचारधाराओ...
व्यवस्था की पहली इकाई परिवार मानी जाती है । व्यक्ति व्यवस्था की इकाई नहीं हो सकता क्योकि व्यक्ति स्वयं से पैदा...