गाँव-गाँव में सस्ता और सुलभ न्याय का प्रस्ताव

26 में प्रातःकालीन सत्र

हम पूरे भारत में न्याय को सस्ता और सुलभ करेंगे। इसके लिए हम यह व्यवस्था करेंगे कि गांव-गांव में एक समझौता न्यायालय रहे। इस समझौता न्यायालय में एक पीड़ित पक्ष का व्यक्ति, एक अपराधी, एक पीड़ित परिवार की ग्राम सभा का प्रतिनिधि, एक अपराधी की ग्राम सभा का प्रतिनिधि और एक पुलिस का प्रतिनिधि — इस तरह पांच लोग मिलकर किसी भी मामले का, चाहे वह हत्या का हो या अन्य किसी भी विषय का, निपटारा कर सकेंगे।

उस निपटारे के खिलाफ यदि इन पांचों में से किसी को अपील करनी होगी, तो वह जिला समझौता न्यायालय में भी अपील कर सकता है और चाहे तो सरकारी न्यायालय में भी अपील कर सकता है। लेकिन अपील होने के बाद अपने को सही सिद्ध करने की जिम्मेदारी अपील करने वाले की ही होगी, समझौता न्यायालय की नहीं।

इस तरह लगभग सभी मुकदमों का फैसला तीन महीने के अंदर कर दिया जाएगा। कुछ गिने-चुने मुकदमे ही न्यायालय में जाएंगे। न्यायालय में भी जो व्यक्ति अनावश्यक अपील करेगा, उस पर भारी दंड लगाया जाएगा। इस तरह अपीलों को भी निरुत्साहित किया जाएगा।

हम यह नहीं चाहते कि मुकदमेबाज हमारी इस न्याय प्रणाली का दुरुपयोग करें। त्वरित न्याय और सुनिश्चित न्याय हमारा बहुत बड़ा लक्ष्य होगा।