समान नागरिक संहिता और भारतीय राजनीतिक संघर्ष

 

27 में प्रातःकालीन सत्र

मैं जब बचपन में बहुत छोटा था, तब बहुत-सी ऐसी विश्वस्तरीय अथवा राष्ट्रस्तरीय बातें बोलता था, जिससे आम लोग मुझे पागल समझने लगते थे, लेकिन मैं अपनी बात पर दृढ़ रहा। धीरे-धीरे लोग कुछ समझने भी लगे। अब इतने लंबे समय के बाद पिछले 10 वर्षों से भारत सरकार लगातार इसी दिशा में जा रही है।

मैं यह नहीं कह सकता कि मेरी लिखी हुई बातें Narendra Modi या Mohan Bhagwat तक पहुंच रही हैं अथवा वे स्वतः ऐसे निर्णय ले रहे हैं, लेकिन यह बात सच है कि सरकार सभी कार्य इसी दिशा में कर रही है और करने के प्रयास भी कर रही है।

यह भी संभव है कि मैं उस समय एकांत में जंगल में बैठकर जो कुछ सोचता था, वही निष्कर्ष वर्तमान परिस्थितियों में देश और दुनिया के विद्वान निकाल रहे हों, लेकिन यह बात सच है कि लगभग उसी दिशा में सरकार लगातार जा रही है और मुझे खुशी है कि मेरी कही हुई और लिखी हुई बातें सच निकल रही हैं।

आप यदि उत्सुक हों, तो मेरी लिखी हुई बातों का संग्रह हमारे कार्यालय से देख भी सकते हैं और पढ़ भी सकते हैं। मेरी लिखी हुई अन्य बातें भी भारत और दुनिया की सरकारें करेंगी, ऐसा मुझे पूरा विश्वास है।

मैं हमेशा ही नेहरू परिवार और साम्यवाद का विरोधी रहा हूं। साथ ही मैं संघ का भी प्रशंसक रहा हूं। 60-65 वर्षों के बाद हमें राजनीतिक व्यवस्था परिवर्तन में आंशिक सफलता मिली। अब नेहरू परिवार और कम्युनिस्ट राजनीतिक सत्ता से बाहर हो गए हैं और सारी राजनीतिक प्रणाली संघ परिवार के मार्गदर्शन में चल रही है।

इसका एक विशेष कारण है। नेहरू परिवार और कम्युनिस्ट वर्ग निर्माण तथा वर्ग संघर्ष पर विश्वास करते हैं, जबकि संघ वर्ग समन्वय पर विश्वास करता है। नेहरू परिवार जातिवाद को मान्यता देता है, अल्पसंख्यक तुष्टिकरण को भी सशक्त करता है, गरीब और अमीर या महिला और पुरुष का भेदभाव कायम रखता है, वर्गों को विशेष अधिकार देता है और हर मामले में व्यक्ति-व्यक्ति के बीच भेदभाव करता है।

Rashtriya Swayamsevak Sangh एक ऐसी राजनीतिक व्यवस्था है, जो जाति भेद, धर्म भेद, गरीब-अमीर, महिला-पुरुष का भेद — किसी प्रकार का कोई वर्ग विद्वेष स्वीकार नहीं करती। हिंदू और मुसलमान के बीच भी संघ भेदभाव नहीं करता। संघ किसी भी वर्ग को विशेष अधिकार देने का विरोधी है, चाहे वह कोई जाति हो, धर्म हो, लिंग भेद हो या कुछ और।

इस तरह संघ एकमात्र ऐसी व्यवस्था है, जो समान नागरिक संहिता को प्रोत्साहित करती है और भारत का राजनीतिक विपक्ष एकमात्र ऐसा समूह है, जो समान नागरिक संहिता का विरोध करता है।

यही कारण है कि मैं आंख बंद करके विपक्ष का विरोध और संघ का समर्थन करता हूं। जाति, धर्म, भाषा, उम्र, लिंग, गरीब-अमीर का भेदभाव करने वाले सभी राजनीतिक दल समाप्त हो जाएंगे — यह मेरी भविष्यवाणी है।