शराबबंदी में सरकार की विफलता और समाज की जिम्मेदारी
13 जुलाई प्रातः कालीन सत्र। मैंने पहले भी कई बार लिखा है कि शराब रोकना सरकार का काम नहीं है। सरकार को अपना काम करना चाहिए और धर्म, परिवार तथा समाज को स्वतंत्रता देनी चाहिए। लेकिन सरकार बिना मतलब धर्म, परिवार और समाज को निकम्मा बताकर सब कुछ खुद करना चाहती है और उसके पास न करने का कोई तरीका है, न साधन है और सफल हो ही नहीं सकती, क्योंकि सिद्धांत विरुद्ध कोई कार्य सफलता नहीं मिलती।
शराब रोकना धर्म, समाज और परिवार का काम है, लेकिन सरकार जिद करके जबरदस्ती इस कार्य में घुस जाती है और निकम्मे धर्मगुरु बार-बार सरकार से शराब रोकने का निवेदन करते हैं। मैंने नीतीश कुमार को भी कई बार लिखा था कि आप गलती कर रहे हैं, लेकिन नीतीश कुमार के मन में तो सरकार की ताकत का बहुत भरोसा था। उन्हें यह उम्मीद थी कि वह सब काम कर लेंगे। लेकिन परिणाम देखिए, शराब तो रुकी ही नहीं, नीतीश कुमार अपराधों को रोकने में भी कमजोर सिद्ध होने लगे।
इसलिए मेरा यह मत है कि नरेंद्र मोदी हमारी इस सलाह को ठीक से समझें। शराब रोकने के लिए नरेंद्र मोदी ने प्रवचन दिया, हमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन शराब रोकना सरकार का काम नहीं है। सरकार को उसमें प्रशासनिक दखल नहीं देना चाहिए। मैं फिर कहता हूं कि शराब रुकेगी धर्म के प्रवचन से, परिवार के संवाद से और समाज के अनुशासन से। शासन से शराब रुक ही नहीं सकती।
मेरा नीतीश कुमार सरकार, गांधीवादियों, आर्य समाजियों और धर्मगुरुओं सबसे निवेदन है कि वह अपनी असफलता स्वीकार करें और मेरी बात पर गंभीरता से विचार करें।
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