नरम हिंदुत्व: धर्म नहीं, प्रवृत्ति के आधार पर भारत का विभाजन

हम लोगों की लाइन बिल्कुल साफ है। हम नरम हिंदुत्व के पक्षधर हैं। हम किसी भी प्रकार के कट्टरवादी हिंदुत्व के पक्ष में नहीं हैं। हम देश को धर्म के आधार पर विभाजित होना गलत मानते हैं। हम यह मानते हैं कि मुसलमानों में भी कुछ अच्छे लोग हैं और हिंदुओं में भी कुछ गलत लोग हैं। यह प्रतिशत कम-ज्यादा हो सकता है, लेकिन शून्य नहीं है।

अब धीरे-धीरे यह बात साफ होती जा रही है कि गोडसेवादी, तोगड़ियावादी, ठाकरे परिवार के पक्षधर, इस प्रकार के कट्टरवादी तत्व मोहन भागवत, नरेंद्र मोदी, आदित्यनाथ से निराश हो रहे हैं। उन लोगों ने यह माना था कि अगर हमारी सरकार आएगी तो भारत हिंदू राष्ट्र होगा, मुसलमानों को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाकर रखेंगे। लेकिन हम लोगों ने समान नागरिक संहिता को महत्व दिया और अभी भी हम मानते हैं कि भारत धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए। भारत का विभाजन शरीफ और बदमाश के बीच ही होना चाहिए। हम प्रवृत्ति के आधार पर विभाजन के पक्षधर हैं, धर्म या जाति के आधार पर नहीं। इसलिए हम धार्मिक कट्टरवाद के पूरी तरह विरुद्ध हैं।

हमें खुशी है कि हम लोगों की बात अब धीरे-धीरे देश समझने लगा है। अभी अयोध्या में बैठकर हम लोगों का जो सम्मेलन हुआ, उसमें संघ, गायत्री परिवार, सर्वोदय, आचार्य कुल, आर्य समाज तथा अन्य इस तरह के नरम हिंदुत्व के पक्षधर सारे लोग एकजुट होकर यह एक संयुक्त संदेश दिए कि भारत नरम हिंदुत्व की दिशा में बढ़ेगा। हम किसी भी प्रकार की सामाजिक हिंसा के विरुद्ध हैं।

हमें खुशी है कि लगातार मोहन भागवत ठीक दिशा में समाज को संदेश दे रहे हैं। हमें गर्व है कि हमें मोहन भागवत जी का भी पूरा-पूरा मार्गदर्शन मिलता है। हमारी इच्छा है कि हम नरेंद्र मोदी और मोहन भागवत के नेतृत्व में दुनिया को नरम हिंदुत्व का संदेश देने में सफल हो सकें।