नई समाज व्यवस्था में महिला-पुरुष संबंधों का संतुलित मार्ग
18 अगस्त प्रातः कालीन सत्र। नई समाज व्यवस्था में हम किसी भी प्रकार के वर्ग निर्माण को ही समाप्त करेंगे। भारत में वर्ग निर्माण के मामले में महिला और पुरुष के बीच आपसी संबंध कैसे हों, यह दुविधा बना दी गई है। महिलाओं और पुरुषों के बीच एक स्वाभाविक आकर्षण भी होता है, जो प्राकृतिक है। उसे हम सामाजिक व्यवस्था के द्वारा व्यवस्थित करते हैं, अनुशासित करते हैं, शासित नहीं।
ऐसी परिस्थितियों में यदि महिला और पुरुष के बीच दूरी घटेगी तो चुंबकत्व पद्धति के आधार पर विस्फोट भी हो सकता है। यदि दूरी आमतौर पर बढ़ेगी तो सृजन में बाधा होना स्वाभाविक है। वर्तमान सरकार इस संबंध में दो तरफ कार्य कर रही है। एक तरफ दूरी बढ़ाने का प्रयास कर रही है, दूसरी तरफ घटाने का भी प्रयास कर रही है और यह संभव ही नहीं है कि दोनों दिशाओं में एक साथ चला जाए। लेकिन यह भी संभव नहीं है कि किसी एक दिशा में तेजी से बढ़ा जाए।
इसलिए हम लोगों ने एक तीसरा मार्ग निकाला है कि महिला और पुरुष अपनी दूरी बढ़ाना चाहते हैं या घटाना चाहते हैं, इसका निर्णय परिवार करें, सरकार नहीं, समाज नहीं। महिला और पुरुष की दूरी के मामले में समाज ने आवश्यकता से ज्यादा हस्तक्षेप किया है और अब समाज का काम राज्य ने ले लिया है। यही कारण है कि महिला और पुरुष के बीच टकराव बढ़ रहा है।
हमारी पुरानी संस्कृति दूरी बढ़ाने की पक्षधर थी, नई संस्कृति घटाने की पक्षधर है और अब हम संदेश दे रहे हैं कि यह निर्णय परिवारों को करना चाहिए। परिवार को मिलकर निर्णय करने की स्वतंत्रता दीजिए।
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