“भारतीय राजनीति में भाजपा के विस्तार और विपक्ष की रणनीतिक कमजोरियों पर विश्लेषण”
आम चुनाव के 6 महीने के भीतर बिहार में बीजेपी की सरकार बन गई। यह एक गंभीर प्रश्न है कि बीजेपी का लगातार देश भर में विस्तार नरेंद्र मोदी की योग्यता का कमाल है अथवा विपक्ष की बेवकूफी का। यह बात सही है कि भाजपा के विस्तार में नरेंद्र मोदी की योग्यता की भी भूमिका है, लेकिन नरेंद्र मोदी की तुलना में विपक्ष की मूर्खता का योगदान अधिक दिखता है। भारत की वर्तमान सरकार बीजेपी की नहीं है, बल्कि एक मिली-जुली सरकार है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी और संघ—इन दोनों की बराबर की भूमिका है।
इस समय विपक्ष की बुद्धिमानी इस बात में होती कि विपक्ष संघ और बीजेपी के बीच कुछ दरार पैदा कर पाता। यह बात जग-जाहिर है कि भारतीय जनता पार्टी की असली ताकत संघ है। संघ के अभाव में भाजपा बौनी दिखाई देती है। इन बातों को जानते हुए भी विपक्ष लगातार मूर्खता कर रहा है कि वह नरेंद्र मोदी और आरएसएस दोनों को एक साथ गाली देता है। यहां तक कि संघ को नरेंद्र मोदी की तुलना में सबसे पहले शत्रु मानने की मूर्खता पूरा का पूरा विपक्ष करता है। आप यह बात देख लीजिए कि संघ अकेला पूरे भारत में मुकाबला कर रहा है और संघ को गाली देने में पूरा का पूरा विपक्ष एक स्वर में खड़ा है। विपक्ष के नेता संघ को गाली देने में आपस में प्रतियोगिता करते हैं। कम्युनिस्ट, गांधीवादी, सांप्रदायिक, मुसलमान तथा कुछ ईसाई भी संघ को गाली देने में सबसे आगे दिखाई देते हैं, भले ही उनकी ताकत बहुत कम हो। मरनासन्न भारत के गांधीवादी सुबह से रात तक 24 घंटे संघ को गाली देने के अलावा कोई अन्य काम नहीं करते, जबकि उनकी ताकत लगभग शून्य हो चुकी है। यही कारण है कि भारत में भारतीय जनता पार्टी लगातार आगे बढ़ रही है। विपक्ष को इस विषय पर अपनी नीतियों पर फिर से विचार करना चाहिए। नकारात्मक राजनीति की जगह सकारात्मक राजनीति अधिक प्रभावी हो सकती है।
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